नेपाल सरकार ने आखिरकार Facebook, WhatsApp और X (Twitter) पर लगाया गया सोशल मीडिया बैन हटा दिया है। यह फैसला तब लिया गया जब देशभर में हुए GenZ protests में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और हालात बेकाबू हो गए।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने बयान में कहा कि नई पीढ़ी की “सोच में अस्पष्टता” और सरकार के प्रयासों को गलत तरीके से समझना ही इस संकट का कारण बना। उन्होंने इन प्रदर्शनों को “अप्रिय स्थिति” करार दिया और कहा कि इससे न केवल जानमाल का नुकसान हुआ बल्कि राज्य की संपत्ति को भी भारी क्षति पहुँची।
ओली ने कहा:
“सरकार कभी भी Social Media को स्थायी रूप से बंद करना नहीं चाहती थी। हमारा उद्देश्य केवल एक registration process लाना था, ताकि सब कुछ कानून के दायरे में हो। लेकिन युवाओं ने इसे गलत समझ लिया और विरोध ने हिंसक रूप ले लिया।”
सीमा पर सतर्कता
इस घटना के बाद भारत-नेपाल सीमा पर भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षा बलों को सख्त निगरानी में रखा गया है ताकि हालात और बिगड़ें नहीं।
निष्कर्ष
यह पूरी स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है — Youth का Freedom of Expression बनाम Government का Control।
नेपाल अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर रहा है जहाँ युवाओं और सरकार के बीच भरोसे की खाई साफ नजर आ रही है। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या कोई संवाद और समझौता होता है या फिर एक बार फिर सड़कों पर आंदोलन लौट आता है।
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