डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से ही अमेरिका–भारत रिश्तों में एक अजीब तनाव देखा जा रहा है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि हर बार भारत पर सीधा प्रहार होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुप्पी साधे रहे।
1. युद्धविराम का श्रेय ट्रम्प को
ट्रम्प ने दावा किया कि दक्षिण एशिया में युद्धविराम केवल उनकी कोशिशों से संभव हुआ। भारत की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। एक राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री होने के नाते मोदी को आवाज उठानी चाहिए थी, लेकिन वे चुप रहे।
2. भारत पर 50% टैरिफ
ट्रम्प प्रशासन ने भारत के कई प्रोडक्ट्स पर 50% तक टैरिफ लगाया। इससे भारत का एक्सपोर्ट मार्केट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर भी कोई सख्त कदम नहीं उठाया।

3. भारतीय आईटी सेक्टर पर हमला
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी IT कंपनियाँ भारतीयों को नौकरी पर न रखें। IT भारत का सबसे बड़ा सेक्टर है, जहाँ लाखों लोग काम करते हैं। ये बयान सीधे-सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रहार है। लेकिन यहाँ भी मोदी फिर चुप।

सवाल ये है – मोदी की योजना क्या है?
क्या वे सिर्फ ट्रम्प को खुश रखने के लिए चुप हैं? या फिर भारत के हित में कोई ठोस कूटनीतिक प्लान ही नहीं है? या ये उनकी राजनीतिक नाकामी का सबूत है?
क्या भारत को ऐसा कमजोर प्रधानमंत्री चाहिए?
प्रधानमंत्री का कर्तव्य है देश के सम्मान और हित की रक्षा करना। अगर हर बार विदेशी नेता भारत को नीचा दिखाएँ और प्रधानमंत्री सिर्फ चुप रह जाएँ, तो सवाल उठना लाज़मी है – क्या भारत सच में इतना कमजोर प्रधानमंत्री डिज़र्व करता है?
सच्चाई ये है कि ट्रम्प की दबंग नीतियाँ और मोदी की चुप्पी – दोनों मिलकर भारत के भविष्य के लिए ख़तरा हैं।
भारत की जनता पूछने को मजबूर है:
“मोदी जी, आपकी असली योजना क्या है?”
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