नई दिल्ली, 6 सितंबर 2025: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “ग्रेट प्राइम मिनिस्टर” और “दोस्त” कहा। ट्रंप ने कहा, “मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूँगा”— लेकिन साथ ही भारत के रूस से तेल खरीदने और अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ पर नाराज़गी भी जताई।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (एक्स) पर लिखा— “मैं राष्ट्रपति ट्रंप की सकारात्मक टिप्पणियों के लिए गहराई से आभारी हूँ और उनकी भावनाओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित करता हूँ। भारत और अमेरिका के बीच एक सकारात्मक और भविष्य उन्मुख व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।”
कूटनीतिक संतुलन
- सकारात्मक संदेश: ट्रंप की आलोचना के बावजूद मोदी ने नकारात्मक लहजा नहीं अपनाया; दोस्ती और साझेदारी को ही उभारा।
- रणनीतिक महत्व: “Comprehensive and Global Strategic Partnership” का उल्लेख दर्शाता है कि संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं—सुरक्षा, भू-राजनीति, तकनीक और वैश्विक हित भी शामिल।
- राजनीतिक संकेत: घरेलू दर्शकों के लिए भारत की वैश्विक हैसियत और बड़े साझेदारों से मज़बूत रिश्तों का संदेश।
- भविष्य दृष्टि: “Forward-looking” शब्द बताता है कि मौजूदा टैरिफ/तेल विवाद अस्थायी हैं, साझेदारी दीर्घकालिक है।
मतभेद और दोस्ती—दोहरी तस्वीर
मतभेद: 50% आयात शुल्क, रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी नाराज़गी, अतिरिक्त 25% पेनल्टी।
दोस्ती: ट्रंप की सराहना, मोदी का सौहार्दपूर्ण जवाब, दीर्घकालिक साझेदारी पर ज़ोर।
यह दोहरा पहलू दिखाता है कि चुनौतियाँ रहते हुए भी व्यक्तिगत समीकरण और राजनीतिक इच्छाशक्ति रिश्तों को स्थिर बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष
मोदी का संदेश मूलतः कूटनीतिक संतुलन का है—एक ओर टैरिफ और ऊर्जा मुद्दों पर मतभेद, दूसरी ओर दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी का महत्व। सरल शब्दों में: “दोस्ती अटूट है, मतभेद अस्थायी।”

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